प्लास्टिक प्रदूषण के पर्यावरण पर दुष्प्रभाव | Plastic Pollution in Hindi

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दोस्तों प्लास्टिक प्रदूषण और इससे होनेवाले पर्यावरणीय खतरे को अच्छी तरह से समझने से पहले हमे यह जानना होगा की प्लास्टिक होता क्या है। प्लास्टिक के ठोस कचरे से मानव समाज और पर्यावरण पर होने वाले समस्या से निजात पाने के लिए हमे प्लास्टिक के हानिकारक गुणों को समझना होगा।

प्लास्टिक प्रदूषण के पर्यावरण पर दुष्प्रभाव | Plastic Pollution in Hindi
Plastic pollution in Hindi

प्लास्टिक का परिचय

प्लास्टिक शब्द ‘प्लास्टिकोस’ शब्द से लिया गया है जो की एक ग्रीक शब्द है जिसका अर्थ है ‘मोल्ड करना’। प्लास्टिक को बनाने के लिए जीवाश्म ईंधन उपयोग किया जाता है। जीवाश्म ईंधन में हाइड्रोजन और कार्बन युक्त यौगिक होते हैं जो लंबे बहुलक(Polymer) अणुओं के निर्माण के रूप में कार्य करते हैं। प्लास्टिक की खोज 1846 में प्रसिद्ध जर्मन रसायनज्ञ Christian Schonbein के द्वारा की गई थी।

भौतिक गुणों के आधार पर, प्लास्टिक को दो प्रकारों में विभाजित किया जाता है: थर्मोप्लास्टिक और थर्मोसेटिंग।

थर्मोप्लास्टिक: यह एक तरह ऐसा प्लास्टिक होता है जिसे गर्म करने पर आसानी से विकृत किया जा सकता है। उदाहरण: पीवीसी, नायलॉन, पॉलिथीन, आदि।

थर्मोसेटिंग: यह उन प्लास्टिक में शामिल हैं जिन्हें एक बार मोल्ड करने के बाद गर्म करके फिर से नरम नहीं किया जा सकता है न ही इसका आकर बदला जा सकता है। उदाहरण: बैकेलाइट, मेलामाइन, आदि। बैकेलाइट का उपयोग विद्युत स्विच बनाने के लिए किया जाता है जबकि मेलामाइन का उपयोग फर्श की टाइलों के लिए किया जाता है।

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प्लास्टिक प्रदूषण क्या है? (What is Plastic Pollution in Hindi)

प्लास्टिक से बानी बस्तुओं का उपयोग करने के बाद उसे कचरे के रूप में भूमि पर या जल स्रोतों पर फेंकना और इन प्लास्टिक कचरे का इकठ्ठा होना ही प्लास्टिक प्रदूषण कहलाता है। प्लास्टिक प्रदूषण के प्रभाव के कारण न केवल इंसान प्रभावित होते हैं बल्कि खाद्य श्रृंखला पर इसका प्रभाव पड़ता है। पर्यावरण में इंसानों तथा बन्य जीवों से ले कर समुद्री जीवन तक प्लास्टिक प्रदूषण का दुष्प्रभाव देखने को मिलता है।

आधुनिक युग के परिवर्तन के साथ प्लास्टिक एक ऐसा वस्तु बन गया है जिसके बिना कोई भी उपकरण अधूरा है। बच्चों के खिलौने से लेकर अंतरिक्ष यान तक बनाने के लिए प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्लास्टिक काफी हल्का होता है और लो कॉस्ट प्राइस में उपलब्ध हो जाता है। आप अपने घर में होने वाले ज्यादातर उपकरण देखेंगे जैसे की कंप्यूटर, फ्रिज, AC, मिक्सचर ग्राइंडर आदि, प्लास्टिक से बना होगा। यह तो हम जान गए की प्लास्टिक हमारे लिए कितना जरूरी है। लेकिन हम प्लास्टिक का इस्तेमाल इतने बड़े पैमाने में करते हैं कि वह प्लास्टिक प्रदूषण का रूप ले लेती है।

हर साल उत्पादित होने वाले प्लास्टिक का 40 प्रतिशत प्लास्टिक का उपयोग सामान्य कामों के लिए या कुछ समय इस्तेमाल में आने वाले उत्पादों में किया जाता है, जैसे की प्लास्टिक की थैलियां, बोतल इत्यादि। कुछ ही समय के लिए इस्तेमाल होते हैं लेकिन इसका प्रभाव पर्यावरण पर सैकड़ों वर्षो तक रहता है। प्लास्टिक प्रदूषण दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहा है जो पर्यावरण के जल-वायु को प्रभावित कर रहा है। मानव जीवन और पृथ्वी पर जीवित प्राणियों पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है ।

प्लास्टिक प्रदूषण के कारण

एक सर्वे के मुताबिक दुनिया भर मैं 8.3 billions मेट्रिक टन प्लास्टिक का उत्पादन 1950 से लेकर 2015 तक में हुआ है, जिसका 80% प्लास्टिक कचरा है। इसका 9% प्लास्टिक ही पुनःनिर्माण में लाया गया है। दुनिया भर में निर्मित प्लास्टिक का 79% पर्यावरण में, महासागरों और जल निकायों में समाप्त हो जाता है।

भारत के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट (2018-19) के अनुसार भारत में प्रति वर्ष 3.3 मिलियन मीट्रिक टन कुल प्लास्टिक कचरे का उत्पादन करती है। भारत की प्लास्टिक कचरे की समस्या समृद्ध दुनिया की तरह विशाल नहीं है लेकिन यह निश्चित रूप से बढ़ रहा है। गोवा और दिल्ली जैसे समृद्ध राज्यों में क्रमशः 60 ग्राम और 37 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रति दिन उत्पादन होता है, जबकि राष्ट्रीय औसत 8 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रति दिन है।

एकल-उपयोग प्लास्टिक

एकल-उपयोग प्लास्टिक(Single use Plastic) वह है जो हम रोजमर्रा के कामों के लिए इस्तेमाल करते हैं, जैसे कि प्लास्टिक की थैलि से राशन लाना हो फल सब्जी लाना हो आदि। आजकल ज्यादातर फूड आइटम प्लास्टिक के Packet में Pack होते हैं जैसे की चिप्स, कुरकुरे, चाकलेट आदि। पैकेजिंग पानी का बोतल, Cold Drink का बोतल आदि सिंगल यूज प्लास्टिक कहलाता है। इन प्लास्टिक को ज्यादातर इस्तेमाल करने के बाद यहां वहां फेंक देते हैं। लेकिन हमारी यह गलती पर्यावरण के लिए बहुत ही हानिकारक है। प्लास्टिक का उत्पादन दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है और उसका इस्तेमाल भी भारी मात्रा में हो रहा है।

प्लास्टिक प्रदूषण के पर्यावरण पर दुष्प्रभाव

प्लास्टिक के हानिकारक प्रभावों – प्लास्टिक एक गैर बायोडिग्रेडेबल पदार्थ है जो ना ही मिट्टी में मिलता है ना ही पानी में घुलता है। इसीलिए इसका प्रभाव सैकड़ों वर्षो तक रहता है। प्लास्टिक से वायु, जल और मिट्टी भी प्रदूषित होता है। जल स्रोत में प्लास्टिक और प्लास्टिक वस्तुओं को फेंकना जल जीवन के लिए जानलेवा है। जल जीवों प्लास्टिक को खाना समझ के या फिर गलती से उसे खा लेते हैं जो उनके लिए जानलेवा साबित होता है।

प्रतिदिन घर से निकलने वाले कचरे को नगर निगम के द्वारा कहीं डंप किया जाता है, उस कचरे के साथ भारी मात्रा में प्लास्टिक होता है। उस कचरे के ढेर से जानवर अपने लिए खाना खोजते हैं लेकिन वहां से खाने के साथ-साथ प्लास्टिक भी खाना पड़ जाता है जो उनके गले में फंस सकता है और उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

मनुष्य भी प्लास्टिक प्रदूषण से प्रभावित होते हैं। जब भी हम होटल का खाना ऑर्डर करते हैं तो ज्यादातर उस खाने को प्लास्टिक के कंटेनर में पैकिंग किया जाता है। जिसके कारण खाने में प्लास्टिक में मौजूद केमिकल गर्म खाने के साथ घुल जाते हैं। और वह खाना हमारे शरीर के लिए हेल्थी नहीं रहता।

माइक्रोप्लास्टिक्स से होने वाले नुकसान

सूरज की रोशनी, हवा और समुद्री लहर की बजह से प्लास्टिक कचरा छोटे छोटे कणों का आकर ले लेती है और हमारे पर्यावरण के वायु मंडल, जल स्रोत आदि में रह जाता है। इन मइक्रोप्लास्टिक की आकर बहुत ही छोटे होते हैं, जिसके कारण यह हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, चाहे वो साँस लेते समय हो या फिर पानी के जरिये हो।

माइक्रोप्लास्टिक छोटे टुकड़ों में टूट रहा है, जो जल स्त्रोतों से नगरपालिका द्वारा हमारे घर तक पहुंचाए जाने वाले पेयजल प्रणालियों में और हवा में बहते हुए पाए जाते हैं। जाने अनजाने में इन मइक्रोप्लास्टिक का सेवन हम इंसान भी कर रहें हैं, जिसके कारण हम बीमार भी पड़ सकते हैं और हमे गंभीर बिमारियों का सामना भी करना पड़ सकता है।

वन्य जीवन को नुकसान

nationalgeographic.com के मुताबिक हर साल प्लास्टिक से लाखों जानवर मारे जाते हैं, पक्षियों से लेकर समुद्री जीवों तक लगभग 700 प्रजातियां प्लास्टिक कचरे के कारण प्रभावित होते हैं। अधिकांश जानवरों की मौत उलझाव या भुखमरी के कारण होती है। माइक्रोप्लास्टिक्स 100 से अधिक जलीय प्रजातियों में पाए गए हैं।

हाथियों, लकड़बग्घा, ज़ेबरा, बाघ, ऊंट, मवेशी और अन्य बड़े स्तनधारियों सहित भूमि-आधारित जानवरों द्वारा प्लास्टिक का सेवन किया गया है, कुछ मामलों में मृत्यु का कारण बनता है।

प्लास्टिक प्रदूषण को कैसे रोके

कई वैज्ञानिक और संरक्षणवाद का कहना है की, प्लास्टिक कचरे को नदियों और समुद्रों में प्रवेश करने से रोकना एक बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों में से एक होगा और प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में अहम् भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही इन प्लास्टिक कचरे की पुनर्चक्रण के साथ अनावश्यक एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक के निर्माण में कमी लाया जा सकता है।

प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए हमें जागरूक होना पड़ेगा। ऐसे सिंगल यूज प्लास्टिक जो हमारे लिए हानिकारक है उसका इस्तेमाल या तो बंद करना होगा या फिर कम करना होगा।

हम प्लास्टिक की थैली के जगह कपड़े का बैग, पेपर बैग आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं। जब तक हम प्लास्टिक थैली का इस्तेमाल करते रहेंगे तब तक फैक्ट्रीज उसे बनाती रहेगी। अगर हम उसे इस्तेमाल करना ही छोड़ दें तो कंपनी का सेल में कमी आएगी और वह प्रोडक्शन कम करेंगे या तो प्रोडक्शन बंद ही कर देंगे।

सरकार द्वारा बनाये गए प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियमो का पला करना भी बहुत जरुरी है। जो भी प्लास्टिक रीसायकल हो सके उसे पुनः उपयोग में लाया जाए। और ऐसे प्लास्टिक के ऊपर प्रतिबन्ध लगाया जाये जो रीसायकल न हो पाए।

निष्कर्ष

प्लास्टिक प्रदूषण को बढ़ाने में हम जिम्मेदार हैं। हमें बहुत सारे आदतों को बदलना पड़ेगा जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। प्लास्टिक का इस्तेमाल दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है अभी सतर्क नहीं होंगे तो आने वाला कल हमारे लिए और आने वाले पीढ़ी के लिए चिंताजनक होगा।

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